खारे पानी में किसान ने तलाशा ‘सुनहरा’ विकल्प, झींगा पालन से 65 लाख का कारोबार

Farmer finds a ‘golden’ alternative in saline water; shrimp farming yields a business worth ₹65 lakh.

– जहां खेती नहीं वहां झींगा पालन ने बदली किसान की तकदीर
– खारे पानी को बनाया कमाई का जरिया, गुरदीप सिंह ने खड़ा किया लाखों का कारोबार
– आधुनिक तकनीक ने गुरदीप सिंह को बनाया सफल मत्स्य पालक

सिरसा, 24 अगस्त।
खारा पानी, सीमित सिंचाई और फसलों का उम्मीद से कम उत्पादन के कारण रघुआना गांव के किसान गुरदीप सिंह के सामने खेती को लेकर चुनौतियां कम नहीं थीं। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को समस्या मानकर रुकने के बजाय उनमें संभावना तलाशने की कोशिश की। इसी तलाश ने उन्हें खेत से तालाब तक और फसल से झींगा पालन तक पहुंचाया।=आज गुरदीप सिंह की पहचान एक ऐसे प्रगतिशील किसान के रूप में बन रही है, जिन्होंने खारे पानी वाली जमीन में व्हाइट श्रिंप पालन को सफल व्यवसाय में बदल दिया। करीब 14 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ यह सफर वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 65 लाख रुपये के वार्षिक कारोबार तक पहुंच गया।

जानकारी जुटाई, प्रशिक्षण लिया और फिर उठाया जोखिम
गुरदीप सिंह ने बताया कि पारंपरिक खेती में खारे पानी और सिंचाई की समस्याओं के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। उन्होंने कृषि से जुड़े सेमिनारों, विशेषज्ञों और ऑनलाइन माध्यमों से झींगा पालन के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। खारी जमीन में झींगा पालन की सफल कहानियों ने उन्हें इस दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क किया और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया। वर्ष 2019 में उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत की। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 14 लाख रुपये की परियोजना लागत से एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाब तैयार किए गए। परियोजना के लिए उन्हें करीब 3.93 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। बाद में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दो और तालाब बनाए गए।

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12 टन से शुरू हुआ सफर, वैज्ञानिक तरीके से 21 टन तक पहुंचा उत्पादन
गुरदीप ने अपने फार्म के लिए उच्च मांग और उत्पादकता को देखते हुए व्हाइट श्रिंप का चयन किया। इसके लिए उन्हें मत्स्य विभाग तथा एक्वाकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, हिसार से प्रशिक्षण मिला। फार्म पर वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किया जाता है। करीब 25 से 32 झींगा प्रति वर्ग मीटर की स्टॉकिंग डेंसिटी रखी जाती है। 120 से 130 दिन की कल्चर अवधि में उत्पादन लिया जाता है। पानी की लवणता, गुणवत्ता और संभावित रोगों की नियमित निगरानी के साथ उच्च गुणवत्ता वाले फीड का इस्तेमाल किया जाता है। शुरुआती वर्ष में गुरदीप सिंह ने 12 टन झींगा का उत्पादन किया और करीब 24 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। इसके बाद उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और उत्पादन बढकऱ 21 टन तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2023-24 में उनका कारोबार करीब 65 लाख रुपये, जबकि शुद्ध लाभ करीब 22 लाख रुपये रहा।

सिर्फ खुद की आय नहीं बढ़ाई, दूसरों के लिए भी रास्ता खोला
झींगा पालन का लाभ केवल गुरदीप सिंह तक सीमित नहीं रहा। इस व्यवसाय से 10 लोगों को प्रत्यक्ष और 15 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। साथ ही क्षेत्र के अन्य किसान भी झींगा पालन की संभावनाओं को समझने लगे हैं। गुरदीप सिंह का कहना है कि शुरुआत में बीमारी और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां सामने आईं। उन्होंने जैव सुरक्षा उपायों, पानी के बेहतर प्रबंधन, प्रोबायोटिक्स के इस्तेमाल और अलग-अलग बिक्री चैनल विकसित करके इन समस्याओं का सामना किया।

जिला मत्स्य अधिकारी बोले- खारी जमीन वाले किसानों के लिए बेहतर विकल्प
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चन्द्र ने कहा कि सिरसा जैसे क्षेत्रों में जहां कुछ स्थानों पर खारे पानी के कारण पारंपरिक खेती प्रभावित होती है, वहां वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किसानों के लिए आय का बेहतर वैकल्पिक साधन बन सकता है। उन्होंने कहा कि किसान झींगा पालन शुरू करने से पहले अपने पानी और जमीन की जांच करवाएं तथा मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लें। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और पात्रता के अनुसार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। गुरदीप सिंह का उदाहरण यह दिखाता है कि सरकारी सहयोग के साथ आधुनिक तकनीक और सही प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी आय के नए स्रोत तैयार कर सकते हैं।

कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और निर्यात की तैयारी
गुरदीप सिंह अब अपने कारोबार को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। उनकी योजना झींगा पालन का क्षेत्र बढ़ाने के साथ आधुनिक एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने की है। वे सिरसा में कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने तथा झींगा बीज, फीड और दवाइयों के वितरण की दिशा में भी आगे बढऩा चाहते हैं। इसके साथ ही वे सीधे निर्यात की संभावनाएं तलाश रहे हैं। उनका लक्ष्य केवल अपना व्यवसाय बढ़ाना नहीं, बल्कि जिले के अधिक से अधिक किसानों को झींगा पालन से जोडकऱ इस क्षेत्र में एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

sahabram1@gmail.com
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