सिरसा। जिले के गांव बनसुधार के हरपाल मास्टर जी का परिवार शिक्षा, मेहनत और सेवा की मिसाल पेश कर रहा है। हरपाल मास्टर जी ने अपना पूरा जीवन शिक्षा के क्षेत्र को समर्पित किया। उन्होंने लंबे समय तक जेबीटी अध्यापक के रूप में बच्चों को पढ़ाया और पूरी निष्ठा व ईमानदारी से अपने दायित्व का निर्वहन किया।
उनके बेटे प्रदीप कुमार ने भी पिता के संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। प्रदीप ने हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की। उनकी सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि पढ़ाई जारी रखने के साथ उन्होंने करीब 10 वर्षों तक मोटरसाइकिल मिस्त्री के रूप में काम किया। दिन में मेहनत-मजदूरी और काम के बीच समय निकालकर पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने कई शैक्षणिक योग्यताएं हासिल कीं।
प्रदीप कुमार ने एमए हिंदी, एमए इतिहास, एमए मनोविज्ञान, एमए समाजशास्त्र, बीएड और एमएड सहित विभिन्न योग्यताएं हासिल कीं। इसके अलावा उन्होंने हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की पात्रता परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। वर्तमान में वे अपने गांव के राजकीय हाई स्कूल में टीजीटी हिंदी के पद पर कार्यरत हैं। खास बात यह है कि उन्हें अपने ही गांव में बच्चों को शिक्षा देने और सेवा करने का अवसर मिला है।
एक बेटा सेना में, दूसरा शिक्षा के क्षेत्र में
हरपाल मास्टर जी के संस्कारों का असर उनके दोनों बेटों के जीवन में दिखाई देता है। उनका एक बेटा भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहा है, जबकि दूसरा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा है। प्रदीप का सफर बताता है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मेहनत, लगन और सीखने की इच्छा के बल पर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मोटरसाइकिल की मरम्मत का हुनर सीखने से लेकर पीएचडी की उपाधि हासिल करने और फिर अपने गांव के बच्चों को पढ़ाने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश देता है।
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