गेहूं न आने से गड़बड़ाया खरीद का आंकड़ा

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गेहूं न आने से गड़बड़ाया खरीद का आंकड़ा

गेहूं न आने से गड़बड़ाया खरीद का आंकड़ा

गेहूं की सरकारी खरीद बंद हो गई है। इस बार सरकारी खरीद एजेंसियों ने 21 लाख 17 हजार 373 क्विंटल गेहूं खरीद किया है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13 लाख 16 हजार 69 क्विंटल कम है। वर्ष 2019-20 में कुल 34 लाख 33 हजार 442 क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी। इसकी वजह पंजाब तथा राजस्थान की गेहूं को हरियाणा में दाखिल न होना बताया जा रहा है। पिछले वर्ष के आंकड़ों से तुलना करें तो स्थिति साफ हो जाती है। पंजाब से सटे डबवाली, देसूजोधा तथा चट्ठा खरीद केंद्र पर पिछले वर्ष 12 लाख 02 हजार 860 क्विंटल गेहूं पहुंची थी। इस वर्ष उपरोक्त केंद्रों पर 6.35 लाख क्विटल गेहूं पहुंची है। सबसे ज्यादा असर डबवाली मंडी में दिखने को मिला है। यहां पिछले वर्ष के मुकाबले करीब आधी गेहूं ही पहुंची है। पंजाब के बाद हम रुख करते हैं राजस्थान से सटी मंडियों का। डबवाली के गांव कालुआना, लोहगढ़ तथा चौटाला में बनी मंडियों में इस बार करीब 4.20 लाख क्विंटल गेहूं पहुंची है। जबकि वर्ष 2019-20 में लगभग 10.89 लाख क्विटल गेहूं पहुंची थी।

वर्ष 2020-21 में सीमावर्ती मंडि़यों में खरीद

केंद्र खरीद क्विंटल

कालुआना 61379

लोहगढ़ 113219

चौटाला 245449

डबवाली 530016

देसूजोधा 69030

चट्ठा 36680

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वर्ष 2019-20 में सीमावर्ती मंडियों में खरीद

केंद्र खरीद क्विंटल

कालुआना 150638

लोहगढ़ 187406

चौटाला 751631

डबवाली 1061667

देसूजोधा 106880

चट्ठा 34313 ———-

आंकड़ों से महज कम खरीद का पता चलता है। हकीकत यह है कि हरियाणा सरकार ने पंजाब-राजस्थान की गेहूं खरीद न करके व्यापारी तथा किसान के बीच पीढि़यों से चले आ रहे रिश्ते का अंत कर दिया है। इससे डबवाली में करीब 2.50 अरब रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। सरकार के मनमाने रवैये के कारण किसान, मजदूर तथा आढ़ती तीनों वर्ग प्रभावित हुए है जिसका गंभीर असर भविष्य में देखने को मिलेगा।

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