Indian Cricket Team :किस रहस्य को समझना ज्यादा मुश्किल है, बरमूडा ट्रायंगल या टीम इंडिया का सेलेक्शन ?
टीम इंडिया की सेलेक्शन पॉलिसी पर बड़ा सवाल. किस तरह और क्यों खिलाड़ियों को रोटेट किया जा रहा है. ये सवाल किसी पहेली से कम नहीं है.
 
 
Indian Cricket Team :किस रहस्य को समझना ज्यादा मुश्किल है, बरमूडा ट्रायंगल या टीम इंडिया का सेलेक्शन ?

Indian Cricket Team :आपने भी बचपन में पढ़ा होगा कि बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य समझना नामुमकिन है. लेकिन आजकल इस रहस्य को टीम इंडिया का सेलेक्शन कड़ी टक्कर दे रहा है. आप बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य को शायद देर-सबेर समझ भी लें टीम इंडिया के सेलेक्शन को नहीं समझ पाएंगे. हाल ही में बीसीसीआई ने सभी मौजूदा सेलेक्टर्स को हटाकर नई सेलेक्शन कमेटी के लिए एप्लीकेशन मंगाई थी. वो सेलेक्शन कमेटी जब बनेगी और नए सिरे से काम करेगी तो उस पर भी बात करेंगे लेकिन फिलहाल मौजूदा टीम इंडिया पर बात करते हैं. इस चर्चा से पहले आपको बता दें कि फिलहाल भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड में वनडे सीरीज खेलने जा रही है. उस टीम की कमान शिखर धवन संभाल रहे हैं. इससे पहले टीम इंडिया ने टी-20 सीरीज में न्यूज़ीलैंड को हराया है.


टी-20 टीम की कमान हार्दिक पंड्या संभाल रहे थे. अभी रुकिए बात खत्म नहीं हुई है. न्यूज़ीलैंड सीरीज के बाद जब टीम इंडिया बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज खेलेगी तो उसके कप्तान रोहित शर्मा होंगे. मौजूदा वनडे कप्तान शिखर धवन उनके डिप्टी यानी उपकप्तान भी नहीं होंगे, उपकप्तान की जिम्मेदारी केएल राहुल निभाएंगे. अगर ये समीकरण आपको समझ आ गया है तो आगे आने वाला समीकरण और कठिन है.

खिलाड़ियों के चयन में भारी भ्रम की स्थिति
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में खेलने वाली टीम के 8 खिलाड़ी ऐसे हैं जो बांग्लादेश के खिलाफ चुनी गई टीम का हिस्सा ही नहीं हैं. पहले इन खिलाड़ियों का नाम बता देते हैं- शुभमन गिल, दीपक हुडा, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह और उमरान मलिक. चलिए अब सवालों पर आते हैं- सवाल कई हैं. इन 8 खिलाड़ियों को बाहर बिठाने का आधार क्या है? अगर इन खिलाड़ियों को आराम दिया जा रहा है तो उन्होंने आराम मांगा भी है क्या? आराम देने का आधार क्या है? अगर न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सीरीज में कुलदीप यादव या उमरान मलिक ने तीन मैच में दस विकेट ले लिए तो आप उन्हें किस आधार पर अगली सीरीज में नहीं खिलाएंगे? शुभमन गिल जैसे बल्लेबाज पर भी यही सवाल लागू होता है. कुल मिलाकर लब्बोलुआब ये है कि न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 14 सदस्यों की टीम में आधे से ज्यादा खिलाड़ी अगली सीरीज नहीं खेलेंगे.

क्या विराट, रोहित जैसे खिलाड़ियों की वापसी से होती है दिक्कत?
बड़े कद वाले खिलाड़ियों का आराम लेना भारतीय क्रिकेट में कोई नई घटना नहीं है. ऐसा होता आया है. आगे भी होता रहेगा. लेकिन असल दिक्कत तब आती है जब इन खिलाड़ियों की टीम में वापसी होती है. इनकी गैर मौजूदगी में खेलने वाले खिलाड़ियों को पता होता है कि वो करिश्माई प्रदर्शन के बाद भी करिश्मा नहीं कर पाएंगे. इस बात को समझने के लिए आप दीपक हुडा का हालिया इंटरव्यू देख सकते हैं. जहां उनसे पूछ लिया गया कि वो टीम में किस पोजीशन पर बल्लेबाजी करना चाहते हैं. उन्होंने साफ तौर पर कहाकि वो नंबर तीन या चार पर नहीं खेल सकते हैं. क्योंकि वहां बड़े दिग्गज खिलाड़ी खेलते हैं इसलिए नंबर पांच के बारे में ही सोचना ‘प्रैक्टिकल’ है. बाद में उनके इस इंटरव्यू पर जमकर प्रतिक्रिया आई. न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में न तो रोहित शर्मा हैं ना ही विराट कोहली लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज में ये दोनों खिलाड़ी वापस आ जाएंगे, तो 8 में से 2 खिलाड़ियों की जगह तो ऐसे ही चली गई. रह गए बाकी 6 खिलाड़ी, उनके बाहर होने का रहस्य अभी बरकरार है.

कैसे बनेगी नए खिलाड़ियों की पहचान
ये कहानी वैसी ही है जैसी हिंदी फिल्मों की प्लेबैक गायकी में होती है. ये चलन काफी पुराना है जब किसी बड़े गायक की जगह कोई नया गायक गाना रिकॉर्ड कराता है. बड़े गायकों के पास समय के ना होने की सूरत में ऐसा होता है. गाना रिकॉर्ड होने के बाद फिल्म का शूट चलता रहता है. बाद में बड़े गायक के आने पर वो उसी गाने को अपनी आवाज में रिकॉर्ड करा देता है. ऐसे में नए गायक की आवाज वाले गाने को हटाकर स्थापित गायक की आवाज वाला गाना इस्तेमाल कर लिया जाता है. मुकेश, रफी, किशोर, लता जी जैसे दिग्गज गायकों के जमाने से ही ऐसी परंपरा चली आ रही है. परेशानी ये है कि गायकी और क्रिकेट में दो बहुत बड़े अंतर हैं. एक फॉर्म दूसरा फिटनेस. खिलाड़ी अपनी फॉर्म और फिटनेस खो देता है. ऐसी कहानी सैकड़ों खिलाड़ियों की है.

इस बात से पड़ता है आईसीसी टूर्नामेंट में बड़ा असर
इन दिनों भारतीय टीम आईसीसी टूर्नामेंट्स नहीं जीत पा रही है. आईसीसी इवेंट में आखिरी जीत उसे 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में मिली थी. हाल ही में हमारी टीम को टी-20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने दस विकेट के बड़े अंतर से हराया था. इसकी कई वजहें हो सकती हैं. लेकिन जरा सोचिए कि टीम में लगातार हो रहे बदलाव इसकी कितनी बड़ी वजह है? ड्रेसिंग रूम में हर रोज चेहरे बदलेंगे तो खिलाड़ियों में आपसी समझ कैसे ‘डेवलप’ होगी? जब एक ही टीम में विराट कोहली, रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, केएल राहुल, शिखर धवन, जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी एक साथ होंगे तो इनके रोल कौन तय करेगा, ये नाम हमने इसलिए लिखे हैं क्योंकि इन्होंने हाल के दिनों में कप्तानी की है. मुसीबत ये नहीं है कि विराट कोहली, रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, केएल राहुल, शिखर धवन, जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी एक ही टीम में हैं.


ये तो टीम इंडिया की ताकत है. समस्या है कि इन खिलाड़ियों को छोड़कर जो बाकि खिलाड़ी चुने जाते हैं उन्हें स्थायित्व क्यों नहीं दिया जाता? हम नए खिलाड़ियों से कंसिस्टेंसी की उम्मीद तो करते हैं लेकिन क्या हम टीम में उनकी जगह को लेकर कंसिस्टेंसी दिखाते हैं? अगर ये कंसिस्टेंसी दिखाई जाती तो इस सीरीज के 8 खिलाड़ी अगली सीरीज से बाहर नहीं होते. किसी भी टीम में कई विकल्पों का होना फायदे का सौदा है- लेकिन तभी तक जब तक उन विकल्पों को लेकर रणनीति साफ हो और जरूरत से ज्यादा भ्रम की स्थिति न बन रही हो. लेकिन मौजूदा भारतीय टीम इसी उधेड़बुन में फंसी हुई है. जब तक ये भ्रम दूर नहीं होगा- आईसीसी वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पास नहीं आएगी. अभी 50 ओवर के वर्ल्ड कप में करीब एक साल का वक्त है. इस एक साल में सिर्फ और सिर्फ उन्हीं खिलाड़ियों को लेकर बात होनी चाहिए जिसके साथ सेलेक्टर्स भी अपनी कंसिस्टेंसी दिखा सकें.