अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें, 2 कंपनियों के शेयर की ट्रेडिंग पर लगी है रोक, जानिए क्या है वजह
 
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बीते कुछ कारोबारी दिन से अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की लिस्टेड कंपनी रिलायंस कैपिटल में ट्रेडिंग नहीं हो रही है। मतलब ये कि अब निवेशक शेयर की खरीद-बिक्री नहीं कर सकते हैं। अनिल अंबानी की ये दूसरी कंपनी है जिसकी ट्रेडिंग पर रोक लगी हुई है। इससे पहले रिलायंस नवल एंड इंजीनियरिंग के शेयरों में भी ट्रेडिंग रोकी गई थी, जो अब तक बरकरार है। अब सवाल है कि ये ट्रेडिंग क्यों रोकी गई है। आइए इसे समझ लेते हैं।

कर्ज में है कंपनी: दरअसल, अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल भारी कर्ज के बोझ तले दबी है। इस कंपनी को कर्ज देने वाले कर्जदाता अपना पैसा वसूल करना चाहते हैं। इसके लिए कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। मतलब ये कि कंपनी की बिक्री हो रही है। यही वजह है कि शेयर की डी-लिस्टिंग की गई है यानी ट्रेडिंग रोक दी गई है।

आमतौर पर डी-लिस्टिंग तब होता है जब कोई कंपनी अपने संचालन को रोक देती है या मर्जर, विस्तार या पुनर्गठन करना चाहती है। जो कंपनी नियमों का सही पालन नहीं करती है या दिवालिया प्रक्रिया में होती है तब भी ट्रेडिंग पर रोक लगती है। रिलायंस कैपिटल के साथ यही स्थिति है। जब कंपनी की डी-लिस्टिंग हुई तब शेयर का भाव 16.19 रुपये था। हालांकि, अब शेयर डीमैट में डेबिट कर दिए गए हैं।

बोली लगाने वालों ने मांगा वक्त: इस बीच, खबर है कि रिलायंस कैपिटल के बोलीदाताओं ने कंपनी की समाधान प्रक्रिया के तहत बाध्यकारी या पक्की बोलियां देने की समयसीमा का चार महीने तक के लिए विस्तार करने का अनुरोध किया है। अमेरिका के एसेट मैनेजमेंट फंड एडवेंट ने 16 सप्ताह का विस्तार मांगा है जबकि पीरामल फाइनेंस ने 12 अतिरिक्त हफ्ते मतलब दिसंबर तक का वक्त मांगा है।

इसी तरह इंडसइंड बैंक ने 10 हफ्ते का विस्तार, ओकट्री ने 12 हफ्ते का और ज्यूरिख रे ने आठ हफ्तों का विस्तार मांगा है। आपको बता दें कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पास अंतिम समाधान योजना दाखिल करने की समयसीमा एक नवंबर, 2022 है।

एक और कंपनी डी-लिस्टेड: आपको बता दें कि अनिल अंबानी की रिलायंस नवल एंड इंजीनियरिंग भी इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्‍सी कोड के तहत दि‍वालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। इस वजह से रिलायंस नवल की भी डी-लिस्टिंग हो चुकी है और अब ट्रेडिंग नहीं होती है।