Solar Expressway: बिजली बनाएगा UP का ये एक्सप्रेसवे, रोशनी में कर सकेंगे सफर, खूबसूरती देख निकल पड़ेंगे गाड़ी लेकर

 
 Solar Expressway

Solar Expressway: भारत में कई एक्सप्रेसवे और हाईवे संचालित है। कई एक्सप्रेसवे बहुत खूबियों से भरे हैं। आज हम आपको यूपी में बनने जा रहे ऐसे हाइस्पीड एक्सप्रेसवे के बारे में बताने जा रहे हैं जो बिजली पैदा करेगा। यूपी में फिलहाल 14 एक्सप्रेसवे है। इनमें बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे सबसे अलग पहचान बनाने जा रहा है ।

उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीडा (UPEIDA) इसको सोलर एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित कर रहा है। 296 किलोमीटर लंबे इस सड़क मार्ग के दोनों किनारों पर सोलर पैनल (Solar Panel) लगाए जाएंगे। यह देश का पहला सोलर एक्सप्रेसवे होगा।

इस परियोजना के पूरा होने से लगभग एक लाख घरों को बिजली मिलेगी। इसके लिए व्यापक पैमाने पर जमीन अधिग्रहण के लिए चिह्नित कर ली गई है। साथ ही 8 सोलर पॉवर डेवलपर्स (Solar Power Developers) ने अपना प्रेजेंटेशन पूरा कर लिया है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे रूट मैप ( Bundelkhand Expressway Route Map)
(चित्रकूट Chitrakoot) - 9 गांव
(बांदा Banda) - 28 गांव
(महोबा Mahoba) - 8 गांव
(हमीरपुर Hameerpur) -29 गांव
(जालौन Jalaun) - 64 गांव
(औरैया Auraiya) -37 गांव
(इटावा Etawah) -7 गांव

PPP मॉडल से तैयार हो रहा सोलर प्लांट

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में (Bundelkhand Expressway) पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर मुख्य मार्ग और सर्विस लेन के बीच 15 से 20 मीटर चौड़ी पट्टी वाला क्षेत्र खाली है। लिहाजा, इसी बेल्ट पर सोलर पैनल स्थापित कर 550 मेगावॉट सोलर पॉवर जेनरेट की जाएगी।

इस परियोजना के पूरा होने से ग्रीन एनर्जी डेवलप (Green Enargy) होगी। इस प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड, पूर्वांचल, लखनऊ आगरा और गोरखपुर एक्सप्रेसवे (Gorakhpur Expressway) पर सोलर पैनल प्लांट (Solar Panel Plant) लगाने से सालाना ऊर्जा खपत पर 6 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा।

लिहाजा, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे इस प्रोजेक्ट को लगाने के लिए सबसे उपयुक्त है। यहां भूमि आसानी से उपलब्ध है। इसके अलावा यहां मौसम अधिकतर साफ और शुष्क रहता है। इसके अतिरिक्त यहां प्रतिवर्ष लगभग 800 से 900 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की जाती है।

296 किमी फोरलेन बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर यूपीडा ने करीब 14850 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसे भविष्य में 6 लेन तक विकसित किया जा सकता है। एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रात-दिन पुलिस पेट्रोलिंग व एंबुलेंस की गस्त रहती है। इसमें वाहन चालकों को टोल टैक्स के रूप में 600 रुपये 3900 रुपये तक चुकता करने पड़ सकते हैं।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे इंट्री-निकास बिंदु (Bundelkhand Expressway Entry-Exit Point)

यह एक्सप्रेसवे इधर चित्रकूट जिले के भरतकूप के पास गोंडा गांव में एनएच-35 से लेकर इटावा के कुदरैल गांव तक फैला है,जहां आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे ( Agra Lucknow Expressway) में मिलता है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे किनारे बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Bundelkhand Expressway Industrial Corridor)

यूपीडा ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे दो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर स्थापित करने के लिए बड़ा बजट प्लान किया है। इसमें पहला कॉरिडोर जालौन और दूसरा बांदा में विकसित होगा। यूपी सरकार ने इसके लिए 1500 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है।

इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की लोकेशन सिकरीगंज से राम जानकी मार्ग पर धुरियापार के पास तय होनी हैं। ये कॉरिडोर बुंदेलखंड में पहले से बन रहे डिफेंस कॉरिडोर (Bundelkhand Defense Corridor) से अलग होंगे।

प्रोजेक्ट जानकारी    विवरण

परियोजना का नाम    बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway)
एक्सप्रेसवे की लंबाई    296 किमी
एक्सप्रेसवे परियोजना की लागत    14,716
सोलर परियोजना की लागत -    14,850 करोड़
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना की लागत    1500 करोड़
लेन    4 -( 6 तक बढ़ाया जा सकता है)
निर्माणकर्ता कंपनी    UPEIDA
एक्सप्रेसवे कार्य पूरा होने का समय    2022
सोलर पावर डेवलपर्स प्रजेंटेशन    टास्को, टोरेंट पावर, सोमाया सोलर साल्यूशन, आर मैनेजमेंट, अवाड़ा एनर्जी, एरिया वृंदावन पावर, एरियाश मोबिलिटी , महाप्राइट

एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे (Access Control Expressway)

चित्रकूट से इटावा तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे अपने आप में खास है। इस सड़क मार्ग को सोलर एक्सप्रेसवे के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके आसपास औद्योगिक सिटी बसाकर लोगों को रोजगार से जोड़ने का प्लान है।

यह सबसे कम 28 महीने में बनकर तैयार होने वाला मार्ग है। यह यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। यह एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे है। इस एक्सप्रेसवे पर 18 ओवरब्रिज, 14 बड़े पुल, 6 टोल प्लाजा, 7 रैंप प्लाजा, 4 रेलवे ओवरब्रिज और 266 छोटे पुल हैं। इसके निर्माण से बुंदेलखंड के ट्रांसपोर्टेशन और विकास में तेजी देखी जा रही है।