Wheat export: 'गहरा जाएगा संकट..', गेहूं एक्सपोर्ट पर भारत के एक्शन से दुनियाभर में हलचल
 
Wheat export

भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. यह फैसला तब हुआ है, जब दुनिया भर में गेहूं की कीमतें बढ़ रही हैं. इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध से दुनियाभर में गेहूं की सप्लाई बाधित हुई है. इस बीच गेहूं निर्यात रोकने पर भारत सरकार के फैसले की G-7 देशों के समूह ने आलोचना की है. जर्मनी के कृषि मंत्री केम ओजडेमिर ने कहा है कि भारत के इस कदम से दुनियाभर में खाद्यान्न संकट बढ़ेगा. हम भारत से G20 सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभालने का आह्वान करते हैं.

बता दें कि यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते गेहूं के निर्यात में बड़ी गिरावट आई है क्योंकि ये दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान निर्यातक है. वहीं, यूक्रेन और रूस से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत से गेहूं की मांग बढ़ गई है. हालांकि यूक्रेन का कहना है कि उसके पास 20 मिलियन टन गेहूं है, लेकिन उसका व्यापार रूट युद्ध की वजह से पूरी तरह से खत्म हो चुका है.

जी-7 शिखर सम्मेलन में उठाया जाएगा मुद्दा

केम ओजडेमिर ने कहा कि इस मुद्दे को अगले महीने जर्मनी में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान उठाया जाएगा, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. उन्होंने कहा, "निर्यात पर प्रतिबंध बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों को प्रभावित करता है, जिन्हें इसकी तत्काल आवश्यकता है. हम यह भी अनुशंसा करते हैं कि इस मुद्दे पर G7 बैठक में एक ठोस निर्णय लिया जाए, जिसमें भारत को आमंत्रित किया जाएगा.' 

वहीं, भारत सरकार ने कहा है कि वो उन देशों को निर्यात की अनुमति देगी जो अपनी "खाद्य सुरक्षा जरूरतों" को पूरा करने के लिए आपूर्ति का अनुरोध करते हैं, क्योंकि रिपोर्ट का दावा है कि भारत में गेहूं की कीमतें कुछ बाजारों में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं. बढ़ते ईंधन और परिवहन लागत ने भारत में गेहूं की कीमतों को और बढ़ा दिया है.

भारत ने मार्च में 70 टन गेहूं किया था निर्यात

बता दें कि भारत ने मार्च यानी पिछले वित्तीय वर्ष में 70 लाख टन गेहूं निर्यात किया था जो कि पिछले साल की अपेक्षा 250 गुना अधिक है. वहीं, अप्रैल में देश ने 14 लाख टन गेहूं का निर्यात किया था. अब भारत ने गेहूं के एक्सपोर्ट को अब 'प्रतिबंधित' सामानों की कैटेगरी में डाल दिया है. 

राज्यों को दिए जाने वाले गेहूं में भी कटौती
 
इधर, गेहूं के निर्यात पर रोक के बाद केंद्र की ओर से कहा गया है कि बढ़ती कीमतों को देखते हुए ये कदम उठाया गया है. दूसरी तरफ स्थिति ये है कि आठ राज्यों में मुफ्त राशन में दिए जाने वाले गेहूं में अगले महीने से कटौती करने का फैसला लिया जा चुका है. अब इसे सिर्फ गरीब परिवारों की चिंता मानकर अपने लिए ऑल इज वेल मान लेना भी ठीक नहीं. हालात गंभीर हैं.

क्यों बने ऐसे हालात?

समझना ये भी जरूरी है कि आखिर मुफ्त अनाज की योजना से गेहूं की कटौती की नौबत क्यों आई? होता ये आया है कि सरकार किसानों से MSP पर गेहूं खरीदकर उसी को मुफ्त अनाज की योजना में जनता तक पहुंचाती है. इस बार हुआ ये है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमत बढ़ गई है. ऐसा इसलिए, क्योंकि रूस और यूक्रेन दोनों ही गेहूं के बड़े निर्यातक हैं. दाम बढ़े तो सरकारी मंडी की जगह व्यापारियों ने किसानों का गेहूं ज्यादा खरीद लिया.

इसका परिणाम ये हुआ कि 1 मई तक के आंकड़ों के मुताबिक सरकारी गोदाम में गेहूं का स्टॉक पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. एक अनुमान है कि पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी तक गेहूं की सरकारी खरीद कम हो पाई है. आगे इसके और भी घटने की आशंका है. ब्रेड-बिस्किट पर भी महंगाई के बादल मंडराने लगे हैं. गेहूं के इस खेल में समस्या और चिंता सबके लिए है.