अगर ब्रेस्‍ट को बनाना है ,हैवी तों करें ये 3 योग 1 महीने मे दिख जाएगा असर

अगर आप छोटे ब्रेस्‍ट से परेशान हैं तो साइज को बढ़ाने के लिए इस आर्टिकल में एक्‍सपर्ट के बताए योगासन को जरूर करें। 

 
अगर ब्रेस्‍ट को बनाना है ,हैवी  तों करें ये 3 योग  1 महीने मे दिख जाएगा असर 

आप सब कैसे हो? मैं बहुत अच्‍छी हूं और आशा करती हूं कि आपकी तरफ से भी सब बढ़िया होगा! आज हम बात करेंगे ब्रेस्ट साइज बढ़ाने वाले योगासन के बारे में। 

ज्यादातर महिलाएं अपने ब्रेस्‍ट के साइज को लेकर चिंतित रहती हैं। कुछ बड़े ब्रेस्‍ट के आकार से खुश हैं जबकि अन्य लगातार बड़े ब्रेस्‍ट पाने का प्रयास करती हैं। बड़े ब्रेस्‍ट होने से एक महिला में आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है और उनकी उपस्थिति थोड़ी आकर्षक भी हो सकती है।

यदि हम आपसे कहें कि आपके ब्रेस्‍ट को बड़ा करने के लिए कुछ योग मुद्राएं हैं, तो क्या आप हमारी बात पर विश्वास करेंगी? लेकिन आपको ऐसा करना होगा क्योंकि यह वास्‍तव में काम करता है! हमें यकीन है कि आपको जरा भी अंदाजा नहीं होगा कि योग आपके ब्रेस्‍ट के साइज को बढ़ा सकता है।

हालांकि, बाजार में कई प्रोडक्‍ट्स हैं - जैसे तेल, मलहम, सक्शन कप, सर्जरी, आदि - जो आपको फुलर बस्ट हासिल करने में मदद करते हैं। लेकिन, वे वह नहीं कर सकते जो योग कर सकता है।

ब्रेस्‍ट बढ़ाने में योग कैसे काम करता है?

प्राकृतिक तरीके से ब्रेस्ट साइज बढ़ाने के कई तरीके हैं और उनमें से एक है योग करना। 

कुछ योग मुद्राएं आपके ब्रेस्‍ट में फैट और ग्‍लैंड के टिशूज को बढ़ाकर आपके ब्रेस्‍ट के साइज को बढ़ाने में मदद करती हैं। कुछ अन्य योगासन आपके ब्रेस्‍ट को सहारा देने वाली मसल्‍स को टोन करते हैं और उन्हें मजबूत बनाते हैं।

संक्षेप में, योग का अभ्यास आपके ब्रेस्‍ट को मजबूत और अधिक सुडौल बनाता है। योगासनों के नियमित अभ्यास से, आप समय के साथ अपने ब्रेस्‍ट साइज को बढ़ा सकती हैं।

एक्‍सपर्ट की राय

जी हां, यदि आप अपने ब्रेस्‍ट का साइज बढ़ाना चाहती हैं तो योग एक समग्र समाधान है। योग बीमारियों की रोकथाम में भी मदद करता है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाता है। योग ब्रेस्‍ट कैंसर और अन्य बीमारियों से पीड़ित रोगियों को उनके उपचार से अधिकतम लाभ प्राप्त करने में मदद करता है। 

आज हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बता रहे हैं जो ब्रेस्‍ट बढ़ाने में आपकी मदद कर सकतेे हैं। इन योगासन के बारे में हमें योग मास्टर, स्पिरिचुअल गुरु और लाइफस्टाइल कोच, ग्रैंड मास्टर अक्षर जी बता रहे हैं।

ग्रैंड मास्टर अक्षर जी का कहना है, 'योग में सांस लेने के व्यायाम, ध्यान तकनीक, मुद्राएं, मंत्रों का जाप और कई अभ्यास शामिल हैं। योग जीवन शैली की कई बीमारियों जैसे कैंसर, डायबिटीज, हाई ब्‍लड प्रेशर, थायरॉयड से संबंधित समस्याओं को रोकने में भी मदद करता है।' 

'लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि आप योग की मदद से अपनी खूबसूरती भी बढ़ा सकती हैं। योग शरीर को सुडौल बनाने में भी मदद करता है।' आइए 3 ऐसे ही योगासन के बारे में आर्टिकल के माध्‍यम से विस्‍तार से जानें। 

1. हस्त उत्तानासन

Hastha uttanasana for breast increase

  • ताड़ासन में खड़ी होकर इस योग की शुरुआत करें।
  • दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। 
  • जैसे ही आप सांस लें, सिर को बाजुओं के बीच में रखते हुए धीरे से पीछे की ओर झुकें।
  • सांस छोड़ें और धीरे-धीरे खड़ी हो जाएं।
  • पीछे झुकते समय आंखें खुली रखें।
  • फिर पुरानी मुद्रा में वापस आ जाएं।

फायदे

  • इसे करने से ब्रेस्‍ट साइज में बदलाव आता है। 
  • यह आपके पोश्चर में सुधार करता है। 
  • मानसिक रोगों को दूर करने में मदद करता है। 
  • रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। 
  • कंधों को मजबूत करता है।  

2. वशिष्ठासन

Vashishtasana for breast increase

आपके ब्रेस्‍ट के किनारे के टिशूज उनके साइज को बढ़ाने में मदद करते हैं। यह मुद्रा आपके ब्रेस्‍ट की मसल्‍स के लचीलेपन को बढ़ाती है और आपके आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। 

  • इसे करने के लिए संतुलासन में बाईं ओर मुड़ें।
  • आप दाहिनी हथेली पर संतुलन बनाएं।
  • एक पैर को दूसरे के ऊपर रख सकती हैं या बाएं पैर को आगे और नीचे ला सकती हैं।
  • दूसरी तरफ से दोहराएं।
  • दोनों हथेलियों के साथ-साथ कोहनी से भी आप इस योग को कर सकती हैं।

3. चक्रासन – व्हील पोज

Chakrasana for breast increase

चक्रासन, जिसे व्‍हील पोज के रूप में भी जाना जाता है, एक और सामान्य मुद्रा है जो ब्रेस्‍ट के साइज को आसानी से बढ़ाने में मदद कर सकती है। इसे रोजाना 5 बार करने से ब्रेस्‍ट की मसल्‍स को फैलाने में मदद मिल सकती है, जिससे साइज बढ़ जाता है।

  • इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं।
  • पैरों को घुटनों पर मोड़ें और सुनिश्चित करें कि पैर फर्श पर मजबूती से टिके हुए हों।
  • हथेलियों को आकाश की ओर रखते हुए बाजुओं को कोहनियों से मोड़ें। 
  • बाजुओं को कंधों से घुमाएं और हथेलियों को सिर के दोनों ओर फर्श पर रखें।
  • सांस लेते हुए, हथेलियों और पैरों पर प्रेशर डालें और पूरे शरीर को एक आर्क बनाने के लिए ऊपर उठाएं।
  • पीछे मुड़कर देखें और गर्दन को आराम दें और सिर को धीरे से पीछे की ओर गिरने दें।
  • शरीर के वजन को चार अंगों के बीच समान रूप से वितरित किया जाना चाहिए।