Haryana Weather: प्रदेश में 5 से 7 अगस्त के बीच अच्छी बारिश की संभावना, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट किया जारी

हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली के मध्य से मानसून टर्फ रेखा गुजर रही है, जिसकी वजह से बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाओं यहां तक आ रही है। इन दोनों सिस्टम की वजह से हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में 5 से 7 अगस्त के दौरान मानसून बारिश की गतिविधियों को दर्ज किया जाएगा।

 
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हरियाणा में दोबारा से मानसून ने लय पकड़ ली है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार 5 से 7 अगस्त क बीच अच्छी बारिश के आसार हैं। भारतीय मौसम विभाग ने भी इसे लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार वर्तमान में मानसून की टर्फ रेखा अब गंगानगर, हिसार, दिल्ली, हरदोई, वाराणसी,जमशेदपुर, बालासोर और पूर्व-दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी से उत्तर-पूर्व तक फैली हुई है।



इसकी वजह से दक्षिणी पूर्वी नमी वाली हवाओं का रुख मैदानी राज्यों पर फिर से जारी हो गया है। पिछले दो दिनों से पश्चिमी पवनों ने मानसून लय को सुस्त कर दिया था, मगर वीरवार से मानसून फिर से लय में आ गया है। साथ ही एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में सक्रिय होने से एक प्रेरित चक्रवातीय परिसंचरण पंजाब और उत्तरी राजस्थान पर बना हुआ है, जिसकी वजह से अरब सागर से प्रचुर मात्रा में दक्षिणी पश्चिमी नमी वाली हवाएं प्रदेश में पहुंच रही है।

इसके अलावा हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली के मध्य से मानसून टर्फ रेखा गुजर रही है, जिसकी वजह से बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाओं यहां तक आ रही है। इन दोनों सिस्टम की वजह से हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में 5 से 7 अगस्त के दौरान मानसून बारिश की गतिविधियों को दर्ज किया जाएगा।

भारतीय मौसम विभाग ने संपूर्ण इलाके पर येलो अलर्ट जारी कर दिया है। गुरुवार को हरियाणा के उत्तरी, केन्द्रीय व पश्चिमी और कुछ दक्षिणी हिस्सों में बारिश की गतिविधियों को दर्ज किया गया। इस दौरान प्रदेश में अधिकतम तापमान 30.8 से 35.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.8 से 28.9 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

जलभराव वाले क्षेत्रों में फसलों को नुकसान
कृषि विभाग के उप निदेशक वीएस फौगाट ने बताया कि जिन एरिया में खेतों में फसल पानी में पूरी डूब गई हो और 8 से 10 दिन से खेत में पानी भरा हुआ है, वहां फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। अगर धान की बात करें तो इसका पौधा थोड़ा सा भी पानी के बाहर रहता है तो वह बच जाता है। कपास की 75 से 90 प्रतिशत फसल में टिंडे बनने शुरू हो गए हैं।

इस फसल में भी अगर 10 दिन में पानी नहीं सूखा है तो वहां उखेड़ा रोग की समस्या आ जाती है, जिससे पौधा खत्म हो जाता है। बादलवाही रहने से चूसक कीड़ों का प्रकोप बढ़ सकता है। बार-बार बारिश से किसान कीटनाशक का छिड़काव नहीं कर पाता, जिससे कीटों पर नियंत्रण नहीं होता।

इसके अलावा बाजरे की अगेती फसल फिलहाल पकने की चरण में है। अगर वहां पानी रुका हुआ है तो उसका दाना ठीक से नहीं बनेगा व उत्पादन कम होगा। ज्यादा बारिश से सब्जियों की फसलों को नुकसान होता है, क्योंकि बारिश के कारण उनका फूल नहीं बन पाता।