हरियाणा में मिला सोने का कारखाना पुरातत्व विभाग ने खोज निकाली 5000 साल पुरानी सोने की फैक्ट्री, यहां बनते थे जेवर
 
हरियाणा में मिला सोने का कारखाना पुरातत्व विभाग ने खोज निकाली 5000 साल पुरानी सोने की फैक्ट्री, यहां बनते थे जेवर

हरियाणा के राखीगढ़ी में हड़प्पा कालीन सोने की फैक्ट्री मिली है। यह फैक्ट्री 5000 साल पुरानी है। पुरातत्व विभाग पिछले 32 सालों से यहां खुदाई कर रहा है। खुदाई में समय-समय पर कई महत्वपूर्ण चीजें मिली हैं। इस बार विभाग को सील, सोना, मिट्टी की चूड़ियां व अन्य महत्वपूर्ण सामान मिला है।

हालांकि गोल्ड काफी कम मात्रा में पाया गया है। साथ ही जो सील पाई गई है, उसमें हड़प्पा काल में प्रयोग की जाने वाली लिपि लिखी है। लिपि को पढ़ने का प्रयास जारी है।

मकानों की मिली डिजाइन

हिसार के राखीगढ़ी में पुरातत्व विभाग ने 7000 साल पुराने शहर की खोज की है। इसमें उस समय के मकानों की डिजाइन भी मिली है। मकानों के अंदर किचन के स्ट्रक्चर भी पाए गए हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग का कहना है कि खुदाई के दौरान तांबे और सोने के कई आभूषण मिले हैं, जिससे पता चलता है कि हजारों साल पहले ये जगह व्यापार और कारोबार का एक महत्वपूर्ण स्थल रहा होगा।

हिसार के राखीगढ़ी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अब तक सबसे बड़ी खोजों में से एक है। यहां मृदभांड, हाथी दांत और मानव की हाड़ियां भी मिली हैं।

महिलाओं के मिले कंकाल

राखीगढ़ी साइट से अब तक कुल 38 कंकाल मिल चुके हैं। फिलहाल 2 महिलाओं के कंकाल मिले हैं, जिनके पास से चूड़ियां, तांबे का आइना और बिखरे हुए टूटे बर्तन मिले हैं. एक कंकाल का डीएनए टेस्ट किया गया है। इससे साबित हुआ कि वह मूल रूप से भारतीय थे।

कंकाल के आसपास से चूड़ियां, टूटे बर्तन का मिलना दर्शाता है कि महिलाएं उस दौर में किसी खास पद पर थीं, क्योंकि हड़प्पा काल में खास व्यक्तियों की विदाई इसी तरह से की जाती थी।

कब्रगाह मिलने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि उस दौर में भी लोग अगले जन्म में विश्वास रखते थे। इसी तरह के कंकाल सिनौली में भी मिले थे।

लिपि को पढ़ने का किया जा रहा है दावा

खुदाई के दौरान सील और कुछ बर्तन मिले हैं, जिसमे उस समय की लिपि अंकित है। इसे अभी तक कोई पढ़ नहीं पाया है लेकिन दावा किया जा रहा है कि इस लिपि को जल्द ही पढ़ लिया जाएगा। अगर लिपि को पढ़ लिया जाएगा तो हड़प्पा सभ्यता की कई बातों का खुलासा हो सकता है।

खुदाई दौरान कई टूटे हुए बर्तन मिले हैं, जिन पर हड़प्पा काल की लिपि अंकित है। साइट से जो भी अवशेष मिले हैं, उन्हें म्यूजियम में रखा जाएगा ।

पर्यटक देख सकेंगे खुदाई में मिले अवशेष

राखीगढ़ी साइट को खुला छोड़ा जाएगा और खुदाई के दौरान मिली चीजें को म्यूजियम में रखा जाएगा। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का विशेष दल राखीगढ़ी पहुंचा और यहां चल रहे खुदाई के काम को देखा। विशेष दल ने एक-एक टीले का भ्रमण किया और खोदाई के दौरान निकली चीजों के बारे में भी जाना। फिलहाल यहां खुदाई जारी रहेगी। सितंबर 2022 से अगली खुदाई शुरू होगी।

हस्तिनापुर वासियों के पूर्वज थे राखीगढ़ी के लोग

‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के ADG डॉ. संजय मंजुल ने बताया कि पिछले दो दशकों में हस्तिनापुर, सिनौली और राखीगढ़ी में विभाग ने काफी काम किया है। ये निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि राखीगढ़ी के लोग ही हस्तिनापुर वासियों के पूर्वज थे। मंजुल ने कहा कि राखीगढ़ी में आज से 7000 साल पहले भी डिजाइनदार घर बनाए जाते थे ।

राखीगढ़ी साइट पर जहां पर अवशेष मिले हैं, वहां पर पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा बारीकी से जांच की जा रही है।

सिनौली साइट पर भी मिल चुके हैं कई जरुरी अवशेष

बागपत जिले की सिनौली साइट हड़प्पा काल के कई अवशेष मिल चुके हैं। कॉलोनी, ईंटों की दीवार, महिला के कंकाल जिसके कानों में सोने के जेवर थे। इसके अलावा शाही ताबूत, युद्ध रथ, मिट्टी की भट्ठी, धनुष, मृदभांड, तांबे की तलवार आदि अवशेष मिल चुके हैं। सिनौली यूपी का एक पुरातात्विक स्थल है, जहां सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित 125 कब्रें पाई गईं थीं।