1583X262px
हरियाणा

सख्ती- अफसरों कर्मचारियों के आश्रितों को आरक्षण पर हरियाणा सरकार सख्त, दिये ये निर्देश

10वीं के रिजल्ट में प्राइवेट स्कूल सरकारी से आगे रहे

हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को आरक्षण के लाभ लेने के मामले में अब सख्ती बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए सरकारी कर्मचारियों को अपने बच्चों के लिए शपथपत्र देना होगा, जिसमें यह बताना होगा कि वह क्रीमीलेयर में नहीं है।

राज्य सरकार के मुताबिक जिन बच्चों के माता पिता प्रथम या द्वितीय श्रेणी के अधिकारी हैं तो उनके आश्रितों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए सख्त रवैया अपनाया है।

हरियाणा सिविल सचिवालय में तैनात एससी-बीसी और ओबीसी कर्मचारियों के लिए जाति प्रमाणपत्र मुख्य सचिव की ओर से जारी किए जाएंगे। मुख्य सचिव की स्थापना शाखा ने जाति प्रमाणपत्र की खातिर आवेदन पत्र का अलग-अलग प्रारूप तैयार कर दिया है। जाति प्रमाणपत्र लेने के इच्छुक सभी कर्मचारियों को इसे भरकर मुख्य सचिव कार्यालय में भेजना होगा।

अनुसूचित और पिछड़ा वर्ग कर्मचारियों को आवेदन में बताना होगा कि वह कब से नौकरी में है और किस विभाग में है। स्थाई आवास कहां है और किस जाति से है। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों को यह शपथपत्र भी देना होगा कि वह खुद या उनका जीवन साथी केंद्र या प्रदेश सरकार की प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी की नौकरी में नहीं है।

वह क्रीमी लेयर में नहीं आते। इन कर्मचारियों को निर्धारित प्रपत्र में अचल संपत्ति की भी जानकारी देनी होगी। झूठे शपथपत्र पर धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्रीमी लेयर ओबीसी की वह कैटेगरी है जिसे एडवांस माना जाता है। इस कैटेगरी के बच्चों को नौकरी और शिक्षा में 27 फीसद आरक्षण नहीं मिलता। मौजूदा नियमों के अनुसार आठ लाख रुपये या इससे अधिक की सालाना आय वाले परिवारों को क्रीमी लेयर की कैटेगरी में रखा जाता है। हालांकि इस राशि को अब बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने की तैयारी है। सेलरी और खेती से आय इसमें शामिल नहीं होते।

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top