झज्जर: UPSC 2021 का Result जिले के लिए रहा उपलब्धियों भरा, इन्होंने पाई सफलता
 
 UPSC 2021 का Result जिले के लिए रहा उपलब्धियों भरा, इन्होंने पाई सफलता

यूपीएससी 2021 का परीक्षा परिणाम जारी होते ही हरियाणा के झज्जर जिले में खुशियां छा गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से युवाओं ने झज्जर जिले का नाम रोशन किया है। परीक्षा पास करने वाले युवाओं का कहना है कि लॉकडाउन में सभी कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद हो जाने के बाद उन्होंने घर पर 10 से 15 घंटे पढ़ाई करके यह मुकाम हासिल किया है। ज्यादातर युवाओं ने पहली बार परीक्षा में ही सिविल सेवा परीक्षा पास की है। 

लोहारी गांव के शुभम कुमार ने यूपीएससी में 519 रैंक हासिल करके जिला का नाम रोशन किया है। सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम घोषित होते ही शुभम के परिवार और गांव में खुशी की लहर छा गई है। शुभम के पिता पीतांबर सिंह चौहान पेशे से अंग्रेजी शिक्षक हैं। उनकी मां सीमा चौहान भी हिंदी की शिक्षक हैं।

शुभम के साथ उनके माता-पिता।

शुभम तीन भाई-बहन हैं और तीनों ने ही अपना लक्ष्य सिविल सेवा में जाने का रखा है। शुभम ने बताया कि मेन परीक्षा में लिटरेचर में उसे अपने पिता की काफी सहायता मिली और उसी की बदौलत वह सिविल सेवा परीक्षा को पास कर पाया है।

मुस्कान डागर को मिठाई खिलाते परिजन।

किसान की बेटी ने हासिल किया 474 रैंक 
साल्हावास। सेहलंगा गांव के एक साधारण किसान की बेटी ने यूपीएससी के परीक्षा में बाजी मारी है। सेलहंगा गांव की बेटी मुस्कान डागर ने सिविल सेवा परीक्षा में 474वां रैंक प्राप्त किया है। बेटी की इस उपलब्धि पर परिजनों में एक खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं ग्रामीणों में भी एक उल्लास छाया हुआ है।

देश की सबसे बड़ी परीक्षा में उसने 474 रैंक प्राप्त करके जिले का नाम रोशन किया है। मुस्कान डागर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से 2020 में ग्रेजुएशन की थी। कोरोना काल में लॉक डाउन लगने के बाद घर से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। मुस्कान ने बताया कि उसने पहली बार में ही परीक्षा उत्तीर्ण की है। वह हर दिन लगभग 14 घंटे पढ़ाई करके सिविल सेवा परीक्षा में 474 रैंक प्राप्त करने में कामयाब हुई। मुस्कान के पिता विकास डागर खेतीबाड़ी का काम करते हैं

और उनकी माता प्रतिभा एक गृहिणी हैं। जिन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी सारी कमाई उनकी शिक्षा पर लगा दी। परीक्षा का परिणाम आते ही परिजनों खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मुस्कान के दादा राम मेहर सिंह और दादी फूलवती देवी ने मिठाई खिलाकर मुस्कान को आशीर्वाद दिया। भाई दक्ष डागर ने भी बहन को मिठाई खिलाकर बधाई दी। दक्ष सीडीएस की तैयारी कर रहा है। गांव के निवर्तमान सरपंच जगत सिंह ने भी उनके घर पहुंचकर आशीर्वाद दिया।

निशा यादव को मिठाई खिलाकर बधाई देते परिजन।

हेड कांस्टेबल की बेटी निशा की आई 489वां रैंक
सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम सोमवार को जारी किया गया। खेड़ी कुमार गांव के हेड कांस्टेबल की बेटी निशा ने सिविल सेवा परीक्षा में 489वां रैंक हासिल कर परीक्षा पास की। निशा यादव के पिता अजय यादव ने बताया कि निशा हर रोज 6 से 7 घंटे घर पर पढ़ाई करती थी। निशा ने अपनी एमए की पढ़ाई जेएनयू से की और पढ़ाई के दौरान ही तैयारी शुरू कर दी थी। निशा की मां लता यादव एक ग्रहणी हैं। उन्होंने निशा की हरसंभव मदद की। सिविल सेवा परीक्षा में पास होने के बाद दादा राव दुलीचंद व दादी छोटू देवी ने मिठाई खिलाकर निशा यादव को आशीर्वाद दिया। निशा का कहा कि कोरोना काल में भी उसने पूरी मेहनत कर तैयारी की है जिसका परिणाम आज सबके सामने है। परिवार के लोगों ने सिविल सेवा में जाने की उन्हें प्ररेणा दी।

माता-पिता के बीच बैठी कनिका को मिठाई खिलाता भाई अमन राठी।

सिविल सेवा परीक्षा में 64वें स्थान पर रहीं कनिका राठी
बहादुरगढ़। शहर के दयानंद नगर निवासी कनिका राठी ने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में 64वां रैंक हासिल किया है। कनिका की सफलता से उनके परिवार व जान-पहचान के लोग फूले नहीं समा रहे हैं। सोमवार को कनिका को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। सफलता हासिल करने की ठान रखी थी, इसलिए कनिका ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की सरकारी नौकरी छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा दी।

करीब 32 साल से दयानंद नगर की गली नंबर-2 में रह रहे नरेश राठी की 28 वर्षीय बेटी कनिका शुरुआत से ही प्रतिभाशाली छात्रा रही हैं। हालांकि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी वर्ष 2015 में शुरू की थी। शहर के बाल भारती स्कूल से 12वीं कक्षा पास करने के बाद दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से गणित के साथ बीएससी पास किया। दिल्ली में करोल बाग स्थित एक कोचिंग सेंटर से एक साल तक कोचिंग ली और 2016 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। सफलता नहीं मिली तो 2017 में फिर प्रयास किया और सफल नहीं हुई तो सरकारी जॉब के लिए तैयारी शुरू कर दी।

अशोका यूनिवर्सिटी से लिबरल स्टडीज में पीजी भी किया। वर्ष 2019 में केंद्रीय गृह मंत्रालय में नौकरी मिल गई। दो साल तक पटना में आईबी में नौकरी की। लेकिन लक्ष्य आईएएस बनना ही था। इसलिए माता-पिता की सहमति से 2020 में सरकारी नौकरी छोड़कर घर लौट आई और तैयारी करते आईसीएस (प्री) की परीक्षा पास की। फिर 2022 की मेन परीक्षा में सफलता पाई। कनिका ने बताया कि गत 30 अप्रैल को साक्षात्कार के बाद 30 मई को परिणाम आया तो 64वें रैंक पर अपना रोल नंबर देख वह खुशी से उछल पड़ीं।

कनिका तीन बहन-भाइयों में मझली हैं। बड़ी बहन वनिता विवाहित हैं और छोटा भाई अमन बीएससी के बाद एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण से रिटायर्ड कनिका के पिता नरेश राठी ने बताया कि उनके खानदान में बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया जाता रहा है। कनिका ने दिल्ली में अंग्रेजी के पीजीटी रहे अपने दादा स्व. दलजीत सिंह राठी का घर में एक आईएएस बनने का सपना पूरा किया है। कनिका की सफलता से उनकी मां नीलम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जोकि दिल्ली के घेवरा स्थित सर छोटूराम पब्लिक स्कूल में अध्यापिका हैं।

सिर्फ 5-6 घंटे की पढ़ाई
कनिका ने बताया कि स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने ठान लिया था कि वह डॉक्टर या इंजीनियर बनने के बजाय सरकारी सेवा में जाना पसंद करेगी, और सरकारी सेवा में आईएएस ही सर्वश्रेष्ठ है। कनिका हर रोज 12-14 घंटे के बजाय केवल 5-6 घंटे ही मन लगाकर पढ़ती थीं। उन्होंने कोचिंग से साल भर तक मार्गदर्शन तो जरूर लिया, लेकिन स्वाध्याय को तवज्जो दी,, यूट्यूब से मदद ली। कनिका को घर में बागवानी करने और पेटिंग करने का शौक है। फेसबुक और इंस्टाग्राम से जुड़ी जरूर हैं लेकिन सक्रिय नहीं रहती। 

माता-पिता व बहन के साथ सफलता की खुशी मनाते शाश्वत सांगवान।

शाश्वत ने 26 साल की उम्र में पाया 34वां रैंक
बहादुरगढ़ शहर के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश सांगवान के बेटे शाश्वत सांगवान ने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में 34वां रैंक प्राप्त किया है। फिलहाल शहर के दयानंद नगर में अपना क्लीनिक चला रहे डॉ. सतीश सांगवान का परिवार दिल्ली के द्वारका में रहता है। चार वर्ष पहले तक डॉ. सांगवान नागरिक अस्पताल में कार्यरत थे। कई वर्ष तक वह परिवार सहित बहादुरगढ़ में ही रहे।

लेकिन कई वर्ष पहले दिल्ली चले गए। उनके बेटे शाश्वत ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में दूसरे ही प्रयास में 34वें रैंक के साथ सफलता प्राप्त की है। डॉ. सांगवान के बेटे की सफलता की खबर सुनते ही उनके शुभचिंतकों ने खुशी जाहिर की, उन्हें फोन करके बधाई दी। मूलत: चरखी दादरी के गांव पैंतावास के डॉ. सतीश सांगवान के बेटे शाश्वत ने यह सफलता दूसरे प्रयास में हासिल की।

डॉ. सांगवान ने बताया कि पिछली बार उनके बेटे शाश्वत का 320वां रैंक रहा था। जिसके आधार पर उन्हें आईडीईएस (इंडिया डिफेंस एस्टेट सर्विसेज) के लिए चुना गया था। फिलहाल आईडीईएस प्रशिक्षण के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी और 34वां रैंक प्राप्त किया। 

शाश्वत की स्कूली व कॉलेज शिक्षा दिल्ली में ही पूरी हुई। शाश्वत की मां ललिता सांगवान भी डॉक्टर हैं, शाश्वत की छोटी बहन एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। शाश्वत की सफलता की खबर मिलते ही शहर के निवासी पंडित पीके शर्मा और प्रवीन कुमार धनखड़ ने फोन करके उनके पिता डॉ. सतीश सांगवान को बधाई दी।