Crime News: मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षामंत्री इंदरसिंह परमार की बहू का किया गया अंतिम संस्‍कार, फांसी लगा की थी आत्‍महत्‍या
 
Crime News: मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षामंत्री इंदरसिंह परमार की बहू का किया गया अंतिम संस्‍कार, फांसी लगा की थी आत्‍महत्‍या

स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की बहू सविता परमार का गांव पोचानेर में अंतिम संस्कार किया गया। सविता ने मंगलवार शाम ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पोस्टमॉर्टम के बाद बुधवार दोपहर करीब 1.15 बजे शव को गांव पोचानेर लाया गया। यहां कुछ समय के लिए शव को घर पर रख रस्में पूरी की गईं, जिसके बाद मुक्तिधाम की अंतिम यात्रा शुरू हुई। अंतिम संस्कार घर से कुछ ही दूरी पर मुक्तिधाम में किया गया। अंतिम संस्कार में सविता के मायके के लोग भी शामिल हुए। सविता की मौत से उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

सविता ने आत्महत्या क्यों की, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस अधिकारी मामले में जानकारी देने से बच रहे हैं। पोस्टमार्टम के दौरान और जब शव गांव पहुंचा तो सविता के पति देवराज की हालत खराब थी। वह बेसुध था, सविता के पिता का भी यही हाल था, वे बहुत दुखी थे और रोते-रोते उनका हाल बेहाल था। वह भी एक बार बेहोश हो गए थे, जिस पर अन्य लोगों ने संभाला। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार की बहू ने मंगलवार को गांव पोचानेर स्थित घर में फांसी लगाकर जान दे दी। मृतका का नाम सविता परमार उम्र 22 वर्ष बताई जा रही है, साथ ही घटना का कारण पारिवारिक बताया जा रहा है। घटना के बाद पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची, जहां देर रात तक जांच जारी रही।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था । सूचना के बाद मंत्री परमार भोपाल से गांव पोचानेर पहुंचे। मृतका के परिजनों ने इस घटना की पुष्टि की है। मृतक सविता की शादी करीब तीन वर्ष पहले मध्य प्रदेश शासन में मंत्री इंदर सिंह परमार के बेटे देवराज परमार के साथ हुई थी। अवंतिपुर बड़ोदिया थाना टीआइ प्रदीप बाल्टर और तिलावद पुलिस चौकी एसआइ इनिम टोप्पो ने बताया कि 22 वर्षीय सविता पत्नी देवराज परमार का शव घर में मिला है। शुरआती जांच में प्रतीत होता है कि फांसी लगने से मौत हुई है। मामले की जांच की जा रही है। सविता अकोदिया थाना क्षेत्र के गांव हड़लाय की रहने वाली थीं। वह एक दिन पहले ही मायके से पोचानेर आई थीं।