सिरसा

सिरसा प्रशासन का अजब गजब कारनामा, 3 साल पहले हादसे में जान गंवाने वाले ड्रग इंस्पेक्टर को सौंपी जांच

Amazing feat of Sirsa administration

सिरसा प्रशासन का अजब गजब मामला सामने आया है। दरअसल सात साल पहले 25 दिसंबर 2014 को शुरू की गई सीएम विंडो स्कीम धरातल पर कितनी कारगर साबित हो रही है। इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि डाटा अपडेट न होने के कारण यह मखौल का पात्र बन चुकी है।

दिसंबर-2018 में सड़क हादसे में हुई थी मौत
डबवाली से जुड़े एक मामले की जांच दिवंगत ड्रग इंस्पेक्टर राकेश छोक्कर को सौंपी गई है। जबकि राकेश छोक्कर की दिसंबर-2018 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र गगनेजा की ओर से एक मामले की शिकायत सीएम विंडो पर बीती 31 अगस्त 2021 को दाखिल की गई थी। सीएम कार्यालय से यह शिकायत ड्रग कंट्रोल अधिकारी सिरसा के रूप में राकेश छोक्कर को सौंपी गई।

यह मामला सीएम कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक सचिव से होता हुआ आयुक्त फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रशन के पास पहुंचा था। वहां से इन दिनों ड्रग कंट्रोलर सिरसा के पास विचाराधीन है। इस मामले से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासनिक स्तर पर डाटा को अपडेट ही नहीं किया गया है। तीन साल पहले जो अधिकारी अकाल मौत का ग्रास बन चुका है, उसे आज भी सीएम विंडो के मामले का जांच अधिकारी दर्शाया जा रहा है। ऐसे में मामले की जवाबदेही किसकी तय की जाएगी? यह बड़ा सवाल है।

ये  है पूरा मामला
सिरसा निवासी नरेंद्र गगनेजा ने डबवाली के चौटाला रोड पर स्थित एक अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सीएम विंडो लगाई थी। शिकायत में कहा गया कि अस्पताल के संचालक डाक्टर ने बिना वैध लाइसेंस के कई माह तक नशीली दवाइयों की बिक्री की। प्रशासन की ओर से अस्पताल को अस्थायी रूप से बंद करने का नोटिस थमाया गया। इस नोटिस के बाद भी उसके द्वारा नशीली दवाओं की बिक्री की जाती रहीं।

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शिकायत में कहा गया कि जब पुलिस द्वारा नशीली दवाओं की बिक्री करने पर आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है। मादक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाता है, जबकि इस मामले में ढिलाई बरती गई है। सीएम विंडो पर शिकायत करने पर तीन साल पहले सड़क हादसे में जान गंवाने वाले ड्रग इंस्पेक्टर राकेश छोक्कर को जांच सौंपी जाती है। नरेंद्र गगनेजा ने इस सेंटर पर सीएम फ्लाइंग अथवा विजिलेंस से औचक जांच करवाने का आग्रह किया था ताकि नशे का खुला कारोबार करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हों।

नहीं हो रही सुनवाई
मनोहर सरकार ने सर्व सुलभ न्याय उपलब्ध करवाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिवस पर 2014 में यह योजना शुरू की गई थी। इन सात वर्षों में सीएम विंडो को इतना कारगर बनाया जा सकता था कि प्रशासनिक व्यवस्था में करंट दौड़ता। सीएम विंडो के माध्यम से लोगों को त्वरित न्याय मिलता और लापरवाह नौकरशाह पर लगाम कसी जाती। लेकिन इन सात वर्षों में अपेक्षित रिजल्ट हासिल नहीं हो सकें। हालांकि इन वर्षों में सीएम विंडो के मामलों के माध्यम से हजारों लोगों को न्याय मिल पाया है।

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