जोश और जुनून ने साकार किया बचपन का सपना, NDA के पहले गर्ल्स बैच की टॉपर शनन ढाका की कहानी
 
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एनडीए एंट्रेंस एग्जाम के नतीजे 14 जून को आए. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इसमें 19 गर्ल्स कैडेट्स का चयन हुआ. इनमें से 10 आर्मी के लिए, 6 एयरफोर्स के लिए और 3 नेवी के लिए चुनी गई हैं. शनन ढाका ने एग्जाम में ओवरऑल 10वां और लड़कियों की कैटिगरी में पहला स्थान हासिल किया है. पहले प्रयास में ही उन्होंने एनडीए की परीक्षा में कामयाबी हासिल की है

ऑल इंडिया टॉपर बनने का शनन ढाका का सफर आसान नहीं रहा. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एंट्रेंस एग्जाम के लिए 5,75,856 युवाओं ने आवेदन दिया था, जिसमें से 1,77,654 महिलाएं थीं. एग्जाम पिछले साल 14 नवंबर को हुआ था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लड़कियों को भी इसमें बैठने का मौका मिला था. शनन के पिता विजय कुमार ढाका और दादा चंद्रभान ढाका भी फौज में थे. दादा चंद्रभान सूबेदार थे जबकि पिता विजय कुमार नायब सूबेदार के पद से रिटायर हुए. शनन के दादा उनके परिवार में पहले व्यक्ति थे, जो सेना में शामिल हुए थे.

नन का बचपन कैंट एरिया में ही बीता. पिता के फौज में होने के कारण शनन की पढ़ाई शुरू से ही आर्मी स्कूलों में हुई. शनन ने चार साल तक रुड़की आर्मी स्कूल, तीन साल जयपुर और पांच साल पंचकूला में चंडीमंदिर के आर्मी स्कूल में पढ़ाई की. शनन का परिवार रोहतक के सुंडाना का रहने वाला है. उनकी मां गीता देवी हाउस वाइफ हैं. बड़ी बहन जौनन मिलिट्री नर्सिंग ऑफिसर हैं जबकि छोटी बहन आशी अभी 5वीं क्लास में पढ़ाई कर रही है.


शनन ने पिछले साल दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में ग्रेजुएशन के लिए दाखिला लिया. शनन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि जैसे ही मुझे पता चला कि एनडीए के एग्जाम में अब लड़कियां भी बैठ सकेंगी, तो मैंने तुरंत ये परीक्षा देने का फैसला कर लिया था क्योंकि बचपन से ही फौज मेरे लिए सपना था. शनन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती हैं. एक्सप्रेस से बातचीत में वह कहती हैं कि उन्होंने बेहद मामूली तरीके से अपनी शुरुआत की और अपने कौशल, दृढ़ संकल्प और ईमानदारी की बदौलत सफलता की ऊंचाइयों को छुआ. राष्ट्रपति बनने के बावजूद वह हमेशा जमीन से जुड़े रहे, ये बात मुझे बहुत प्रभावित करती है.
मिलिट्री ट्रेनिंग के प्रतिष्ठित इंस्टिट्यूट में एनडीए में नए कैडेट्स की ट्रेनिंग जून 2022 से शुरु होगी. इन्हें अब 3 साल तक ट्रेनिंग दी जाएगी. ये ट्रेनिंग उन्हें लड़कों के साथ ही करनी होगी. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, गर्ल्स के लिए अलग से स्टाफ रहेगा. उनके रहने के लिए एक स्क्वॉड्रन तैयार की जा रही है.