Ias success story :IAS कुणाल यादव ने नौकरी के साथ की UPSC की तैयारी, दूसरे प्रयास में ऐसे पाई सफलता
अधिकतर यूपीएससी के कैंडिडेट्स को यही लगता है कि पूरे दिन पढ़ाई करने के बाद ही आईएएस (IAS) बना जा सकता है. इसके लिए अधिकतर कैंडिडेट सब कुछ छोड़कर केवल यूपीएससी पर ही ध्यान देते हैं. वहीं, जब नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करने की बात आती है तो बहुत से कैंडिडेट पीछे हट जाते हैं.
 
IAS कुणाल यादव
 Ias success story:  अधिकतर यूपीएससी के कैंडिडेट्स को यही लगता है कि पूरे दिन पढ़ाई करने के बाद ही आईएएस (IAS) बना जा सकता है. इसके लिए अधिकतर कैंडिडेट सब कुछ छोड़कर केवल यूपीएससी पर ही ध्यान देते हैं. वहीं, जब नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करने की बात आती है तो बहुत से कैंडिडेट पीछे हट जाते हैं. उनका कहना होता है कि नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करना असंभव जैसा है. आज हम आपको एक ऐसे आईएएस की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी की और वह अपने दूसरे प्रयास में सफल हुए.

आईएएस कुणाल यादव रेवाड़ी के शक्तिनगर के रहने वाले हैं. वह शुरू से ही पढ़ाई में काफी होशियार थे. उन्होंने शहर के जैन पब्लिक स्कूल से बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में जिले भर में टॉप किया था. इसके बाद, कुणाल ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में केमिस्ट्री की पढ़ाई की.

आईएएस कुणाल यादव ने साल 2015 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी. साल 2015 में उन्होंने पहली बार एसएससी सीजीएल की परीक्षा पास की थी लेकिन उन्हें यह नौकरी पसंद नहीं आई तो उन्होंने ज्वाइन नहीं किया. फिर उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में पीओ पद के लिए आवेदन किया तो उसमें भी उनका चयन हो गया.

कुणाल यादव ने यूपीएससी परीक्षा से पहले कई अन्य सरकारी परीक्षाएं दी थीं. स्टेट बैंक के बाद उनका चयन स्टेशन मास्टर के साथ सेना में सहायक कमांडेंट के पद पर हुआ लेकिन उन्होंने इस बार भी नौकरी नहीं की और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने लगे. साल 2018 में वह अपने पहले प्रयास में UPSC की प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पाए थे.

IAS कुणाल यादव ने वर्ष 2020 में UPSC परीक्षा के अपने दूसरे प्रयास में 185वीं रैंक हासिल की थी. IAS प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2021 में उन्हें दिल्ली में आयकर विभाग में एक निरीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया. वह रोजाना 8-10 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे. आईएएस कुणाल यादव इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे कोई नौकरी के साथ भी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर सकता है.