पिता किसान, तीसरी बार क्रैक किया UPSC, पढ़ें रवि सिहाग के IAS बनने की कहानी
 
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कैसे आया यूपीएससी का ख्याल –

रवि बताते हैं कि वे अपने पिता के साथ बचपन से ही खेती-किसानी का काम देखते थे. बीए तक उन्होंने खेती से जुड़े हर काम की जिम्मेदारी संभाली है. ऐसे में जब गांव में खेतों को लेकर, सिंचाई को लेकर या इससे संबंधित किसी भी एरिया में समस्या आती थी तो कहा जाता था कलेक्ट्रेट ऑफिस जाओ. हर परेशानी का समाधान वहीं होता था. तब से वे सोचते थे कि आखिर कलेक्टर होता कौन है जिसके पास हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान होता है. इसके अलावा गांव में अक्सर लोग कहते थे कि तुम कौन सा कलेक्टर हो जो ये काम कर लोगे, ये परेशानी दूर कर दोगे वगैरह. ऐसी बातें सुनकर ही रवि का इस क्षेत्र के प्रति आकर्षण पैदा हुआ. तभी बीए के बाद उन्होंने इस क्षेत्र में किस्मत आजमाने का फैसला किया ताकि लोगों की समस्या का समाधान आसानी से कर सकें


 

UPSC 2021 के सिविल सर्विस एग्जाम के सोमवार को घोषित किए गए परीक्षा परिणाम में श्रीगंगानगर जिले के रवि सिहाग ने भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है. साधारण किसान परिवार में जन्मे और हिंदी मीडियम में अपनी पढ़ाई करने वाले रवी सिहाग ने सेल्फ स्टडी के दम पर तीसरी बार UPSC एग्जाम क्रैक किया हैं. यूपीएससी 2021 के सिविल सर्विस एग्जाम में 18वीं रैंक हासिल करने वाले रवि सहाग का श्रीगंगानगर जिले के श्रीविजयनगर तहसील के गांव 3 DAM में एक साधारण किसान परिवार में जन्म हुआ है. अपनी तीन बड़ी बहनों के इकलौते और सबसे छोटे भाई के द्वारा तीसरी बार UPSC एग्जाम क्रेक करने पर परिवार में जबरदस्त खुशी और उत्साह का माहौल है.

रवि सिहाग के पिता राम कुमार सिहाग मात्र मैट्रिक पास है और किसानी करते हैं. तो वही रवि की माता विमला देवी भी सिर्फ 8 वीं पास है और घर गृहस्थी चलाती हैं. इसके साथ ही रवि की तीन बड़ी बहनें हैं. रवि सिहाग की सबसे बड़ी बहन पूनम हैं, मंझली बहन रविना सिहाग हैं जो श्रीगंगानगर जिले में ही अंग्रेजी विषय की शिक्षक हैं तो सबसे छोटी बहन कोमल सिहाग हैं जो आंगनबाड़ी सुपरवाइजर हैं.


 
एनसीईआरटी से किया बेस मजबूत –

रवि कहते हैं कि यूपीएससी का सिलेबस ठीक से देखने और समझने के बाद उन्होंने बेसिक बुक्स से शुरुआत की. अपने इस सफर में सबसे खास साथी वे एनसीईआरटी की किताबों को मानते हैं. रवि कहते हैं कि यूपीएससी परीक्षा एक पूरा पैकेज होती है जो प्री से लेकर पर्सेनेलिटी टेस्ट तक आपको हर प्रकार से टेस्ट करती है. पहले आप यह ठीक से समझ लें कि आखिर यह एग्जाम आपसे चाहता क्या है उसके बाद मैदान में उतरें.

बुक लिस्ट की जहां तक बात है तो यह ज्यादातर स्टूडेंट्स के लिए सेम ही होती है बस ख्याल इस बात का रखना है कि कम से कम किताबें इकट्ठी करें और उनसे बार-बार पढ़ें. लिमिटेड रिसोर्स, मैक्सिमम रिवीजन पॉलिसी को फॉलो करें. ये मानकर चलें कि किताब में लिखा एक-एक शब्द आपको पता होना चाहिए इतनी बार रिवीजन हो जाए.


 

परिवार ने बताया- रवि ने कैसी की पढ़ाई

रवि सिहाग की बड़ी बहन रवीना सिहाग ने बताया कि रवि बचपन से ही पढ़ाई के प्रति समर्पित रहा और कम संसाधन होने के बावजूद अपनी पढ़ाई को नियमित रखा और अपने आत्मविश्वास को भी बनाए रखा. रवि सिहाग की सफलता का श्रेय उसके परिवार और माता-पिता को जाता है जिन्होंने उसे हर फैसले में समर्थन दिया और कम संसाधन होने के बावजूद उसे हमेशा प्रोत्साहित किया. रवि सिहाग ने गांव के ही स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा हिंदी मीडियम में पूरी की तो वहीं श्रीगंगानगर के अनूपगढ़ से उसने हिंदी माध्यम से ही BA पास किया. BA पास करने के बाद ही रवि सिहाग के द्वारा केवल कुछ महीने की ही कोचिंग दिल्ली में ली गई और उसके बाद रवि ने गंगानगर में रहकर ही सेल्फ स्टडी कर यूपीएससी एग्जाम को तीसरी बार क्रैक कर डाला और 18 वीं रैंक भी हासिल कर डाली.

अंग्रेजी भी है जरूरी –

रवि आगे कहते हैं कि हिंदी मीडियम चुनना और उससे परीक्षा देना ठीक है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको इंग्लिश नहीं सीखनी होगी. इस परीक्षा में सफलता हासिल करने और आगे काम-काज देखने के लिए इंग्लिश एक मुख्य जरूरत है. इसलिए इसे इग्नोर न करें और न ही यह सोचें कि आप हिंदी मीडियम के हैं तो अंग्रेजी सीखने की आपको कोई आवश्यकता नहीं.

अंत में बस इतना ही कि इस परीक्षा को लेकर कैंडिडेट्स के मन में कई प्रकार की भ्रांतियां है उनमें से एक है कि यह परीक्षा बहुत कठिन है और इसे आसानी से पास नहीं किया जा सकता. रवि कहते हैं कि सभी का अपना सोचना होता है पर उन्हें ऐसा लगता है कि यह परीक्षा पास करना इतना भी कठिन नहीं. सही अपरोच के साथ सही दिशा में बढ़ने और कड़ी मेहनत के साथ कोई भी इस परीक्षा को पास कर सकता है. रवि कहते हैं कि अगर मैं कर सकता हूं तो कोई भी कर सकता है.