खाद के भाव को लेकर बड़ी खबर ; किसानों को होगा फायदा
 
खाद के भाव को लेकर बड़ी खबर ; किसानों को होगा फायदा

रबी सीजन के लिए किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्धता के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार ने जहां एक और हाथ के लिए पर्याप्त भंडारण कर रखा है वहीं दूसरी ओर सरकार रबी सीजन के लिए रूस से खाद आयात करने वाली है, इससे किसानों का फायदा होगा।

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन युद्ध और ईरान और रूस पर लगे प्रतिबंध के चलते वैश्विक स्तर पर फ़र्टिलाइज़र की कीमतों में भारी तेजी है, इसके अतिरिक्त ढुलाई खर्च में भी वृद्धि हुई है, यूरिया का मूल्य साल भर में $380 से बढ़कर $930 प्रति टन पहुंच गया है। इससे केंद्र सरकार पर सब्सिडी का भार भी बढ़ रहा है, इसी कारण सरकार चाहती है कि सस्ते दाम पर उर्वरक आयात हो सके इसीलिए सरकार रूस से उर्वरक आयात करेगी।

रूस से आयात होगा उर्वरक (Rabi Season Fertilizer Import 2022)
रूस यूक्रेन मध्य के मध्य युद्ध के मद्देनजर अमेरिका की अगुवाई वाले कई पश्चिमी देशों में रोज पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगा रखें है। जिसके बावजूद भारत का सबसे बड़ा डीएपी खाद आपूर्तिकर्ता देश रूस बन गया है। ऐसे में भारत में रूस से सस्ते डीएपी खाद के आयात से घरेलू बाजार में उपलब्धता सुधरेगी। जिस खाद की बढ़ती कीमतें थमेगी और किसानों को उचित मूल्य पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

दरअसल भारत ने रूस से अप्रैल जुलाई के बीच 3.5 लाख टन डाईअमोनियम फास्फेट (डीएपी) खाद आयात खरीददार का करार किया है यह आयात आर्डर इंडियन पोटाश लिमिटेड, राष्ट्रीय केमिकल फर्टिलाइजर्स, चंबल फर्टिलाइजर्स कृषक भारतीय को-ऑपरेटिव को मिला है। इन कंपनियों को यह आर्डर 920 – 925 डॉलर प्रति टन की कीमत पर मिला है। इसमें माल पहुंचाने का भाड़ा भी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि किसी अन्य देश को इतनी कम कीमत पर डीएपी खाद रुस (Rabi Season Fertilizer Import 2022) से नहीं मिला है। वहीं बांग्लादेश से लगभग 8 लाख टन खाद के लिए 1020 – 1030 रुपए प्रति टन पर करार किया है। वहीं पाकिस्तान 1030 डॉलर प्रति टन पर अब तक डील फाइनल नहीं कर पाया है। जिसका एक बड़ा कारण पाकिस्तान रुपए के मूल्य में डॉलर की तुलना में बहुत अधिक गिरावट होना है।

रूस द्वारा सस्ते में उर्वरक देने का विश्व स्तर पर यह प्रभाव पड़ेगा
रूस द्वारा रियासत दर पर डीएपी खाद (Rabi Season Fertilizer Import 2022) की सप्लाई किए जाने से इसके अन्य सप्लायर देशों पर दबाव बनेगा।इसमें मोरक्को का ओसीपी ग्रुप, चीन का वाइयूसी, सऊदी अरब का माडेन और साबिक शामिल है। ऐसे में संभव है कि बाजार आधिपत्य बनाए रखने के लिए इन्हें भी डीएपी खाद के दाम में कटौती करनी पड़े। वही देश में अप्रैल से जुलाई के बीच कुल 9.5 -9.6 लाख टन डीएपी खाद का आयात होने का अनुमान है।

इसमें से सर्वाधिक खाद और रूस से आयात हो रहा है। वही सऊदी अरब से 2.8 लाख टन, चीन से 1.27 लाख टन और मोरक्को से 1.03 लाख टन खाद आयात होगा। वहीं भारत ने पिछले वित्त वर्षा में कुल 58.60 लाख टन डीएपी खाद का याद किया था। इसमें से सर्वाधिक खाद का आयात 20.43 लाख टन चीन से हुआ था। जिसके बाद सऊदी अरब से खाद का आयात 19.33 लाख टन और मोरक्को से खाद का आयात 12.12 लाख टन हुआ था। वहीं भारत द्वारा आपूर्ति स्त्रोतों का विस्तार देना एक समझदारी वाला देश है।

खाद की समस्या दूर होगी
देश ने पहले यूरिया के मामले में ऐसा किया और पहली बार अमेरिका से 47000 टन यूरिया मंगवाया। ऐसे में यही डीएपी (Rabi Season Fertilizer Import 2022) के साथ किया जा रहा है। वही रियासत दर वाला खाद का आयात बिल्कुल सही समय पर आ गया है क्योंकि खरीफ सीजन के लिए बोवाई हो चुकी है उल्लेखनीय है कि इससे खाद की कमी की समस्या दूर होगी और किसानों को सस्ते दाम पर खाद मिल पाएगी जिससे किसानों को खाद के मद में खर्च में कमी आ सकती है।

डीएपी खाद पर कितनी मिल रही है सब्सिडी
Rabi Season Fertilizer Import 2022 | केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2022 के पहले किसानों को राहत प्रदान करते हुए डीएपी पर 5 गुना सब्सिडी बढ़ा दी थी, सब्सिडी रहित डीएपी खाद की एक बोरी 3851 की हो गई थी, लेकिन किसानों को सब्सिडी के साथ यह बोरी 1350 रुपए में मिल रही है। यानी कि सरकार द्वारा डीएपी खाद की एक बोरी (50 kg) पर अब 2501 रुपए की सब्सिडी दी जा रही है।

अन्य उर्वरकों के यह भाव
भारतीय कंपनी इफको द्वारा उर्वरकों (Rabi Season Fertilizer Import 2022) की जारी सूची के अनुसार यूरिया 266.50 रुपये प्रति बैग (45 किलो), DAP 1,350 रुपये प्रति बैग (50 किलो), NPK 1,470 रुपये प्रति बैग (50 किलो), MOP 1,700 रुपये प्रति बैग (50 किलो), सिंगल सुपर फास्फेट की 50 किलो की एक बोरी किसानों को 425 रुपये में, वहीं दानेदार खाद 465 रुपये के भाव मिल रही है। केंद्र सरकार ने इस बार NPK आधारित खाद के दामों को स्थिर रखने के लिए कंपनियों को सब्सिडी देने का फैसला किया था। यही कारण है कि इस बार खाद उर्वरकों के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।