Viral News: सरकार कोल इंडिया सहित इन कंपनियों में बेच सकती है हिस्सेदारी, जानिए लिस्ट में और कौन हैं शामिल ?
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्तरों पर इन कंपनियों में हिस्सा बिक्री से भी सरकार को 2 अरब डॉलर या फिर 16500 करोड़ रुपये तक हासिल हो सकते हैं,
 
 
Viral News: सरकार कोल इंडिया सहित इन कंपनियों में बेच सकती है हिस्सेदारी, जानिए लिस्ट में और कौन हैं शामिल ?

Viral News :सरकार फाइनेंशियल ईयर की अंतिम तिमाही में आय बढ़ाने के लिए कई सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में ये बात सामने आई है. ब्लूमबर्ग के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भारत सरकार कोल इंडिया, हिंदुस्तान जिंक और राष्ट्रीय कैमिकल्स में 5 से 10 तक हिस्सेदारी बेच सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से ये हिस्सा बिक्री की जाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्तरों पर इन कंपनियों में 5 प्रतिशत हिस्सा बिक्री से भी सरकार को 2 अरब डॉलर या फिर 16500 करोड़ रुपये तक हासिल हो सकते हैं. हालांकि इस बारे मे सरकार या किसी कंपनी की तरफ से कोई बयान या जानकारी सामने नहीं आई है. औऱ न ही इन खबरों की पुष्टि हुई है.


4 ऑफर फॉर सेल की योजना
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार के द्वारा हिस्सा बिक्री की योजना में 4 ऑफर फॉर सेल शामिल हैं. इसमें कोल इंडिया, एनटीपीसी, हिंदुस्तान जिंक और राइट्स शामिल हैं. वहीं अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार राष्ट्रीय कैमिकल्स फर्टिलाइजर और नेशनल फर्टिलाइजर में 10 से 20 प्रतिशत तक हिस्सा बिक्री कर सकती है. वहीं आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के लिए बोलियां मार्च तक आमंत्रित किए जाने की संभावना है. बिक्री प्रक्रिया का समापन अगले वित्त वर्ष में हो सकता है. सरकार ने आईडीबीआई बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर बैंक का निजीकरण करने के लिए पिछले सप्ताह संभावित निवेशकों से बोलियां आमंत्रित की थीं.वहीं हाल ही में सरकार ने एक्सिस बैंक में 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 3,839 करोड़ रुपये जुटाये हैं। सरकार ने यह हिस्सेदारी यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया के विशेषीकृत उपक्रम (एसयूयूटीआई) के जरिये रखी थी.


सरकार कम करेगी विनिवेश लक्ष्य
निजीकरण में लगने वाले समय को देखते हुए सरकार हिस्सा बिक्री से रकम जुटाने की रणनीति में बदलाव कर सकती है. पिछले महीने ही एक अधिकारी ने कहा था कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (सीपीएसई) में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री की गुंजाइश कम हो गई है और निजीकरण को पूरा होने में समय लगता है, इसलिए भारत को अपने बजट में निर्धारित विनिवेश के लक्ष्य को कम करना होगा. उनके मुताबिक अब ध्यान रणनीतिक बिक्री की ओर स्थानांतरित हो गया है और इसके साथ विनिवेश लक्ष्य को कम करना होगा क्योंकि निजीकरण एक समय लेने वाली प्रक्रिया है.