Investment: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश की ओर बढ़ रहा है औद्योगिक निवेशकों का रुझान, निवेश के मामले में बिहार सबसे पीछे

उत्तर प्रदेश हरियाणा उत्तराखंड मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में औद्योगिक सेक्टर के निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ रही है। वहीं पंजाब बिहार जैसे राज्य नहीं कर पा रहे हैं औद्योगिक निवेशकों को आकर्षित। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दो ऐसे राज्य हैं जो निवेशकों को सबसे ज्यादा लुभा रहे हैं।
 
 
बिसनेस न्यूज़

Investment:  औद्योगिक सेक्टर के निवेशकों का रुझान उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों की ओर बढ़ रहा हैं। लेकिन पंजाब, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में औद्योगिक निवेशक खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। औद्योगिक निवेश के लिहाज गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले की तरह निवेशकों की पसंद बने हुए हैं। निवेशकों के रुझान से पता चला कि वे सबसे अधिक इलेक्टि्रकल उपकरणों के निर्माण में निवेश करना चाहते हैं। फूड प्रोसेसिंग, ड्रग्स व फार्मा, केमिकल, मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर के प्रति भी निवेशक अधिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं।


मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक निवेश के रुझान से पता चलता है कि किन राज्यों में निवेश के लिए कैसा माहौल है। जमीन की उपलब्धता, आसान कारोबारी प्रक्रिया, सरकारी सहूलियतें जैसी कई चीजों पर निवेश का रुझान निर्भर करता है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए 91 प्रस्ताव मंजूरी के लिए डीपीआईआईटी के पास आए जो देश भर में औद्योगिक निवेश के लिए रखे गए प्रस्ताव का 6.35 फीसद था।


निवेशकों को लुभा रहा हैं यह दो राज्य 

वहीं, वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए 114 प्रस्ताव रखे गए जो कुल औद्योगिक निवेश के प्रस्ताव का 7.66 फीसद था। वर्ष 2022 में अगस्त तक उत्तर प्रदेश में 51 प्रस्ताव रखे गए जो कुल प्रस्ताव का 6.29 फीसद है। डीपीआईआईटी के मुताबिक ये सभी प्रस्ताव 100 करोड़ से ऊपर के हैं। उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश भी औद्योगिक निवेशकों को लुभा रहा है। मध्य प्रदेश में 2020 में निवेश के 93 प्रस्ताव रखे गए जो 2021 में बढ़कर 113 हो गए और इस साल अगस्त तक निवेश के लिए 50 प्रस्ताव आ चुके हैं।


निवेश के मामले में बिहार सबसे पीछे 
हरियाणा में वर्ष 2020 में 42 प्रस्ताव तो वर्ष 2021 में 44 और इस साल अगस्त तक 27 प्रस्ताव आ चुके हैं। बिहार में वर्ष 2020 में सिर्फ पांच प्रस्ताव आए जो कुल प्रस्ताव का 0.34 फीसद रहा। वर्ष 2021 में 21 प्रस्ताव आए तो कुल प्रस्ताव का 1.41 फीसद था। इस साल अगस्त में सिर्फ पांच प्रस्ताव आए हैं जो कुल प्रस्ताव का 0.3 फीसद है।